जायफल या जायफर…

जायफल या जायफर…

39
0
SHARE
जावित्री के अन्दर जायफल होता है जो अण्डाकार, गोल और बाहर से शमायला रंग का सिकुड़ा हुआ, और तीव्र गन्धयुक्त होता है. फोटो :- गूगल.

भारतीय खान-पान में कई मसालों व जडीबुटीयों का प्रयोग पौराणिक काल से किया जा रहा है. इनमे कई ऐसे मसाले है जो आयुर्वेदिक दवाइयों में भी प्रयोग किया जाता है. भारतीय घरों की रसोईयों में इन मसालों का प्रयोग कई रूपों में किया जाता है. आज हम एक ऐसे मसाले के बारे में बात कर रहे हैं जिनका प्रयोग आमतौर पर रसोई में गरम मसाले के रूप में किया जाता है. लेकिन ये गरम मसाले के साथ-साथ आयुर्वेदिक औषधी भी है जिनका प्रयोग कई गंभीर बीमारियों में भी किया जाता है.

भारतीय रसोई में कई मसालों का प्रयोग किया जाता है उनमें से एक जायफल भी है जिसे संस्कृत में जातीफल के नाम से भी जाना जाता है. इसका वानस्पतिक नाम (Myristica fragrans) मिरिस्टिका फ्रेग्रेंस है. इसे अंग्रेजी में nutmeg कहा जाता है. यह एक सदाबहार वृक्ष होता है. मिरिस्टिका नामक वृक्ष से जायफल तथा जावित्री प्राप्त होती है. इसकी अनेक जातियाँ हैं परंतु व्यापारिक जायफल अधिकांश मिरिस्टिका फ्रैग्रैंस से ही प्राप्त होता है. मिरिस्टिका प्रजाति की लगभग 80 जातियाँ हैं, जो भारत, आस्ट्रेलिया तथा प्रशंत महासागर के द्वीपों में उपलब्ध हैं.

मिरिस्टिका वृक्ष के बीज को जायफल कहते हैं. यह बीज चारों ओर से बीजोपांग (aril) द्वारा ढँका रहता है. इस वृक्ष का फल छोटी नाशपाती के रूप का 01 इंच से डेढ़ इंच तक लंबा, हल्के लाल या पीले रंग का गूदेदा होता है. परिपक्व होने पर फल दो खंडों में फट जाता है और भीतर सिंदूरी रंग का बीजोपांग या जावित्री दिखाई देने लगती है. जावित्री के भीतर गुठली होती है, जिसके काष्ठवत् खोल को तोड़ने पर भीतर जायफल प्राप्त होता है.

जायफल का वृक्ष समुद्रतट से 400-500 फुट तक की ऊँचाई पर उष्णकटिबंध क्षेत्रों में उगाया जाता है. इसकी मिट्टी दूमट होती है. इसके वृक्ष 06-07 वर्ष की आयु प्राप्त होने पर फूलते-फलते हैं. फूल लगने के पहले नर या मादा वृक्ष का पहचाना बहुत ही कठिन होती है. जायफल का वृक्ष हमेशा हरा रहने वाला और सुगन्धित होता है.

इस वृक्ष के तने शयामले रंग के होते हैं, जिसमें बाहर छिद्र होता है और अन्दर लाल रंग के द्रव्य होते हैं. इसके पत्ते लम्बे और भालाकार होते हैं. इसके फूल छोटे-छोटे, सुगंधित और पीले-सफेद रंग के होते हैं. यह गोलाकार, अण्डाकार लाल और पीला रंग का होता है. जायफल को चारों ओर से घेरे हुए लाल रंग का कड़ा मांसल कवच होता है, जिसे जावित्री‘ कहते हैं. यह सूखने पर अलग हो जाता है जिसे जावित्री कहा जाता है. इसी जावित्री के अन्दर जायफल होता है जो अण्डाकार, गोल और बाहर से शमायला रंग का सिकुड़ा हुआ, और तीव्र गन्धयुक्त होता है.

जायफल और जावित्री का स्वाद गुण लगभग समान होता है, जायफल थोड़ा अधिक मीठा होता है वहीं जावित्री का स्वाद अधिक स्वादिष्ट होता है. जायफल में सोडियम,पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, शर्करा प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. जायफल की तासीर गर्म होती है. इसलिए इसका सेवन हमेशा सर्दियों में बेहद ही कम मात्रा में किया जाता है. आमतौर पर जायफल को घिसकर उपयोग में लाया जाता है.

इतिहास के पन्नो के अनुसार, मध्ययुग काल में यह महत्वपूर्ण और महंगा मसाला था जिसका इस्तेमाल व्यंजनों में स्वाद के लिए और दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता था. एलिज़ाबेथन के समय में माना जाता था कि जायफल ने प्लेग को दूर किया था. 17वीं शताब्दी में डच ने जायफल के व्यापार में अपना वर्चस्व कायम किया. ब्रिटिश और डच लंबे समय तक द्वीप पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए संघर्ष में लगे रहे, जो जायफल का एकमात्र स्रोत था.

जायफल का विश्व उत्पादन प्रति वर्ष 10,000-12,000 टन के बीच अनुमानित है और विश्व भर में वार्षिक मांग 9,000 टन का अनुमान लगाया गया है. इंडोनेशिया और ग्रेनाडा में इसका उत्पादन सबसे अधिक है और विश्व बाजार में क्रमशः 75% और 20% की हिस्सेदारी के साथ दोनों उत्पादों का निर्यात करता है. अन्य निर्माताओं भारत, मलेशिया (विशेष रूप से पेनांग शामिल है जहां जंगली क्षेत्रों में पेड़ देशी हैं), पापुआ न्यू गिनी, श्रीलंका और कैरेबियाई द्वीप जैसे सेंट विन्सेन्ट. मुख्य आयात बाजारों में यूरोपीय समुदाय, संयुक्त राज्य अमेरिका,  जापान और भारत हैं.

फायदे और नुक्सान…

  • इसका सेवन अनिद्रा को दूर करने के लिए किया जाता है.
  • यह पेट की समस्याओं जैसे डायरिया व एसिडिटी को दूर करता है. साथ हीं पाचन शक्ति को मजबूत करता है.
  • इसका प्रयोग मांसपेशियों, जोड़ों के दर्द या ऐंठन की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है.
  • इसका प्रयोग गठिया के सूजन व दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है.
  • इसका प्रयोग पेट के कैंसर में भी किया जाता है.
  • इसका प्रयोग मोटापे को कम करने के साथ-साथ डायबिटीज टाइप-2 के लिए भी किया जाता है.
  • इसका प्रयोग दांतों में कैविटी होने पर किया जाता है.
  • इसका प्रयोग तनाव को को दूर करने में किया जाता है. जायफल के सेवन से दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारता है और एकाग्रता को बेहतर करने में मदद करता है.
  • इसका प्रयोग रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में किया जाता है.
  • इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो जाता है.
  • इसका प्रयोग तनाव को दूर करने में किया जाता है.
  • इसका प्रयोग मूत्र (पेशाब) संबंधी विकारों में भी किया जाता है.
  • जायफल का फेस पैक लगाने से कील-मुंहासों की लालिमा और सूजन को दूर कर चेहरा आकर्षक और सुंदर होता है.
  • त्वचा संक्रमण में भी जायफल का प्रयोग होता है.
  • झुर्रियों को दूर करने में भी सहायक होता है.

नुक्सान:-

जायफल की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में सेवन नहीं करना चाहिये. अधिक मात्रा में सेवन करने से चक्कर आने की समस्या, घबराहट, पेट खराब, उल्टी व मतली जैसी परेशानियां हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की परामर्श के अनुसार सेवन करना चाहिए.