जलवायु परिवर्तन में सुधार, पर्यावरण संकट से छुटकारा एवं सामाजिक जागृति लाना...

जलवायु परिवर्तन में सुधार, पर्यावरण संकट से छुटकारा एवं सामाजिक जागृति लाना ही जल-जीवन-हरियाली अभियान का मकसद है :- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

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जागरूकता सम्मेलन में विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास रिमोट के माध्यम से शिलापट्ट का अनावरण कर किया. फोटो:-पीआरडी, पटना.

बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली यात्रा के दूसरे दिन जागरूकता सम्मेलन में 1042 करोड़ रुपये की लागत वाली 589 विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास रिमोट के माध्यम से शिलापट्ट का अनावरण कर किया. पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड मुख्यालय स्थित महंत शिवशंकर गिरि महाविद्यालय स्टेडियम में आयोजित जागरूकता सम्मेलन में मुख्यमंत्री को पौधा एवं अंगवस्त्र भेंटकर तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त पंकज कुमार ने उनका अभिनंदन किया. दीप प्रज्ज्वलित कर जागरूकता सम्मेलन का मुख्यमंत्री ने विधिवत उद्घाटन किया. स्थानीय नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को गुलदस्ता, अंगवस्त्र एवं माला पहनाकर उनका स्वागत किया. जल-जीवन-हरियाली अभियान एवं पूर्वी चंपारण से जुड़ी विकासात्मक योजनाओं से संबंधित पुस्तिका का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया. मुख्यमंत्री ने विवाह सहायता अनुदान, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लाभार्थियों को लाभ एवं 518 जीविका समूहों को 07 करोड़ 77 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया.

सम्मेलन से पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रखण्ड सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र, अरेराज एवं विश्व बैंक संपोषित बिहार समेकित सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण परियोजना अंतर्गत वृद्धजनों, दिव्यांगजनों एवं विधवाओं हेतु सामाजिक सुरक्षा एवं देखभाल केंद्र (बुनियादी केंद्र) का उद्घाटन शिलापट्ट का अनावरण कर किया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने इन केन्द्रों का मुआयना भी किया. मुख्यमंत्री ने जल-जीवन-हरियाली उद्यान का भी उद्घाटन किया एवं परिसर में वृक्षारोपण किया. अनुमंडल कार्यालय अरेराज के समक्ष ड्रिप सिंचाई प्रणाली के तहत शुरू की गई फूलों की खेती का मुख्यमंत्री ने निरीक्षण कर कृषि विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली.

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सबसे पहले कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे बेहद खुशी हो रही है. आपने जब से हमें काम करने का मौका दिया है, तब से हमने न्याय के साथ विकास का काम करते हुए हाशिये पर खड़े सर्व समुदाय के लोगों के उत्थान हेतु विशेष काम किया है. हमने बिहार में कानून का राज कायम किया. पहले चम्पारण की क्या स्थिति थी. बिहार के हर इलाके का न सिर्फ विकास हुआ है बल्कि प्रति व्यक्ति आय और बिहार का बजट भी बढ़ा है. बिहार के हर गांव और उसके टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है. यही नहीं बिहार के सुदूर इलाके से 05 घंटे में लोग पटना पहुंच सकें, इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. आज इस सम्मेलन के माध्यम से भी 827 करोड़ रुपये की लागत वाली 493 सड़कों का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने हर यात्रा की शुरुआत चम्पारण से की है. इस धरती का काफी महत्व है. 1917 में बापू ने इसी चंपारण से सत्याग्रह की शुरुआत की, जिसके 30 सालों के अंदर ही देश आजाद हो गया. हम जब भी कोई नया निर्णय लेते हैं तो उसके क्रियान्वयन के लिये समीक्षा एवं अपनी यात्रा की शुरुआत कर लोगों की राय लेते हैं ताकि उसे सही रूप में लागू किया जा सके. चम्पारण के प्रति हमारे मन में श्रद्धा का भाव है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मौसम में बदलाव के कारण बिहार कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ का दंश झेल रहा है. 2018 में बिहार के सभी 534 प्रखंडों में से 280 ब्लॉकों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा. जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण में आए बदलाव को देखते हुए हमने इस वर्ष 13 जुलाई को विधानमंडल सदस्यों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जो आठ घंटे तक चली. बैठक में हमलोगों ने पूरे बिहार में जल-जीवन-हरियाली-अभियान चलाने का निर्णय लिया. इस अभियान में जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम को भी जोड़ा गया है. जल-जीवन- हरियाली अभियान के तहत अगले 03 वर्षों में 24,500 करोड़ रूपये की राशि खर्च कर 11 सूत्री कार्यक्रम को मिशन मोड में पूरा किया जाना है ताकि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न संकट से लोगों को निजात दिलाया जा सके. इसके लिए सोखते का निर्माण, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, वृहत् पैमाने पर वृक्षारोपण, आहर-पईन, तालाब, सार्वजनिक कुंओं, नलकूप का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही उसे अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में 15 जून से ही मानसून की शुरुआत हो जाती थी और औसतन 1200 से 1500 मिलीमीटर वर्षापात हुआ करता था लेकिन पिछले तीस साल के वर्षापात का अगर रिकॉर्ड देखें तो औसतन 1500 मिलीमीटर से घटकर वर्षापात 1017 मिलीमीटर पर पहुँच गया है. वहीं विगत 13 वर्षों के वर्षापात के आंकड़ां को देखें तो बिहार में औसतन वर्षापात घटकर 901 मिलीमीटर पर पहुँच गया है. इस वर्ष भूजल स्तर दक्षिण बिहार के साथ-साथ उत्तर बिहार के दरभंगा में भी काफी नीचे चला गया था. दुनिया के कई देशों में जल की समस्या उत्पन्न हो गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रोहतास और कैमूर के इलाके में ही खेतों में फसल अवशेष जलाए जाते थे लेकिन अब यह सिलसिला पटना, नालंदा होते हुए नार्थ बिहार चम्पारण और पूर्णिया के इलाके में भी पहुंच गया है, जो बहुत ही खतरनाक है. खेतों में फसल अवशेष जलाए जाने की परम्परा पर पाबंदी लगाने के लिए लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ हमलोग किसानों की मदद भी करेंगे. उन्होंने कहा कि फसल कटाई के वक्त खेतों में फसलों का अवशेष नहीं रहे, इसके लिए रोटरी मल्चर, स्ट्रा रिपर, स्ट्रा बेलर एवं रिपर कम बाइंडर जैसे यंत्रों की खरीद पर राज्य सरकार किसानों को 75 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, एवं अति पिछड़े समुदाय के किसानों को 80 प्रतिशत का अनुदान मुहैया करा रही है. अगर जरूरत पड़ी तो अनुदान की राशि बढ़ाई जायेगी. लोगों को अपनी मानसिकता बदलकर फसल कटाई के लिए इन नये यंत्रों को उपयोग में लाना होगा ताकि फसल अवशेष को पशुचारे में परिणत किया जा सके. हमने जबसे काम संभाला है, दूध के उत्पादन में 04 गुणा तक वृद्धि हुई है.

मुख्यमंत्री कहा कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वराशक्ति कम हो जाती है. फसल अवशेष प्रबंधन को भी जल-जीवन-हरियाली अभियान से जोड़ा गया है, इससे जलवायु परिवर्तन बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि खेतों में बुआई के लिए हैपी सीडर और जीरो टीलेज मशीन की खरीदारी पर भी 80 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था है, इन यंत्रों का इस्तेमाल करने से कृषि में पानी के इस्तेमाल में भी कमी आएगी. उन्होंने कहा कि लोगों को प्रेरित करके ही जलवायु परिवर्तन के खतरों से कुछ हद तक निपटा जा सकता है. बिहार के ग्रामीण अंचल में 89 प्रतिशत लोग निवास करते हैं और 76 प्रतिशत लोग जीविकोपार्जन के लिए खेती पर ही निर्भर हैं. मौसम के अनुकूल फसल चक्र में बदलाव लाने के लिए प्रयोग के तौर पर 08 जिलों में अनुसंधान का काम शुरू करवाया गया है, जिसे बाद में पूरे बिहार में लागू किया जाएगा ताकि किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचाने के बाद अब कृषि फीडर के माध्यम से हर इच्छुक किसानों को 75 पैसे प्रति यूनिट की दर पर सिंचाई के लिए बिजली मुहैया कराई जा रही है. इस साल के अंत तक सभी जर्जर तार भी बदल दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि झारखंड अलग होने के बाद बिहार में हरित आवरण क्षेत्र मात्र 09 प्रतिशत ही रह गया था. वर्ष 2012 से हरियाली मिशन के तहत पूरे बिहार में 19 करोड़ पौधे लगाये गये, जिसके बाद बिहार का ग्रीन कवर एरिया बढ़कर 15 प्रतिशत पर पहुंचा है. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 08 करोड़ पौधे और लगवाये जायेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले साल चुनाव में जाने से पहले पूरे बिहार में हर घर तक नल का जल उपलब्ध करा देंगे. नल का जल शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल है इसलिए इसका दूसरे कामो में दुरुपयोग न करें. इससे भूजल स्तर नीचे चला जायेगा और एक समय ऐसा आएगा कि भूजल खत्म हो जाएगा. शौचालय निर्माण का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. लोगों को खुले में शौच से मुक्ति और पीने का अगर स्वच्छ पानी मिल जाय तो 90 प्रतिशत बीमारियों से उन्हें छुटकारा मिल जाएगा. मेरा काम है आपकी सेवा करने के साथ ही आपको जागृत करना.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर इच्छुक परिवार तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हमने दिसंबर 2018 तक निर्धारित किया था, जिसे तय समय सीमा से दो माह पहले ही पहुंचा दिया गया. हर घर बिजली योजना को अपनाए जाने के साथ-साथ अब केंद्र ने भी वर्ष 2024 तक हर घर नल का जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा ही अक्षय ऊर्जा है जो हमें पृथ्वी का अस्तित्व बरकरार रहने तक सदैव मिलता रहेगा. ग्रिड के माध्यम से हम जो बिजली पहुंचा रहे हैं, उसकी एक समय सीमा है, क्योंकि कोयले का सीमित भंडार है इसलिए सौर ऊर्जा के प्रति हमलोग लोगों को प्रेरित करेंगे क्योंकि सही मायने में सौर ऊर्जा ही असली ऊर्जा है, सौर ऊर्जा ही है जो सदैव लोगों को मिलता रहेगा. इसके लिए सबसे पहले सभी सरकारी भवनों पर सोलर प्लेट लगाने के बाद लोगों को अपने-अपने घरों पर सोलर प्लेट लगाने के लिए हमलोग प्रेरित करेंगे. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीने के कारण दुनिया भर में मरने वालों की संख्या प्रतिवर्ष 30 लाख है. दुनिया भर में जितनी मौतें होती हैं उसमें 15.03 प्रतिशत मौत शराब पीने के कारण हुआ करती है. शराब सेवन के कारण दुनिया भर में 18 प्रतिशत आत्महत्या, 18 प्रतिशत आपसी झगड़े, 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटना, 48 प्रतिशत लीवर की बीमारी हुआ करती है.

जनसभा में उपस्थित लोगों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से बचने एवं पर्यावरण को ठीक रखने के लिए हमें काम करना चाहिये. सात निश्चय के अलावा अन्य योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण सहित सभी क्षेत्रों में विकास का काम किया जा रहा है. वर्ष 2017 में शराबबंदी के पक्ष में जबकि 2018 में बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ हमलोग मानव श्रृंखला बना चुके हैं. अब एक बार फिर 19 जनवरी 2020 को दिन के साढ़े 11 बजे आधे घंटे के लिए दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ, जबकि शराबबंदी और जल-जीवन-हरियाली अभियान को लेकर मानव श्रृंखला बनाने का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया है, आप सबों की भागीदारी से इस बार बनने वाली मानव श्रृंखला पूर्व में बनी सभी मानव श्रृंखला के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी.

मुख्यमंत्री की अपील पर जनसभा में मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर मानव श्रृंखला में शामिल होने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि जल महत्वपूर्ण है यह लोगों को समझाना होगा क्यांकि जल और हरियाली के बीच ही जीवन है. जलवायु परिवर्तन में सुधार, पर्यावरण संकट से छुटकारा एवं सामाजिक जागृति लाना ही जल-जीवन-हरियाली अभियान का मकसद है. मनुष्य को यदि अपना और पशु-पक्षियों का जीवन बचाना है तो जल के साथ-साथ हरियाली को बचाने के लिए भी सचेत और जागरूक होना पड़ेगा. जनसभा में मौजूद लोगों से मुख्यमंत्री ने आपस में प्रेम, भाईचारा एवं सद्भाव का माहौल कायम रखते हुए पृथ्वी के संरक्षण और अपने जीवन की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया.

जनसभा को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री विनोद नारायण झा, कला, संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह, विधायक राजू तिवारी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पाण्डेय एवं तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त पंकज कुमार ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर विधायक सचीन्द्र प्रसाद सिंह, विधायक लाल बाबू गुप्ता, विधान पार्षद सतीश कुमार, विधान पार्षद वीरेंद्र नारायण यादव, विधान पार्षद खालिद अनवर, विधान पार्षद बबलू गुप्ता, पूर्व मंत्री अवधेश कुशवाहा, पूर्व विधायक महेश्वर सिंह, जदयू जिलाध्यक्ष भुवन पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील मणि त्रिपाठी, लोजपा जिलाध्यक्ष धरनीधर मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव  चंचल कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, चम्पारण रेंज के डी०आई०जी० ललन मोहन प्रसाद, जल-जीवन-हरियाली मिशन के मिशन निदेशक राजीव रौशन, जिलाधिकारी रमन कुमार, पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारीगण, जीविका की दीदियां एवं बड़ी संख्या में आमलोग उपस्थित थे.