गाँधी-दर्शन को आज भारतीय शिक्षा-व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए:-राज्यपाल लालजी...

गाँधी-दर्शन को आज भारतीय शिक्षा-व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए:-राज्यपाल लालजी टंडन

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आजादी मिल जाने के बाद गाँधी हमसे छीन गए तथा देश का भूगोल रचनेवाले सरदार पटेल भी स्वतंत्र भारत में बहुत दिनों तक हमारा साथ नहीं निभा सके. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

शुक्रवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन स्थित राजेन्द्र मंडप में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का औपचारिक उदघाटन करते हुए कहा कि, “राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का जीवन-दर्शन आज सम्पूर्ण विश्व के लिए पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक और उपयोगी बन गया है. गाँधीवाद’ एक ऐसा व्यावहारिक दर्शन है, जिसका जीवन के हर क्षेत्र में व्यापक प्रभाव है और इसका अनुसरण कर मौजूदा विभिन्न चुनौतियों से निबटा जा सकता है”.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, लॉर्ड मैकाले की चलायी गई शिक्षा-पद्धति में आज परिवर्तन की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि गाँधी जी ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ नहीं बल्कि ‘सर्वधर्म समादर एवं समभाव’ की बात की थी. गाँधी जी अपने भजन में ईश्वर और अल्लाह दोनों को याद करते थे तथा सभी मनुष्यों के लिए सुमति की कामना करते थे. गाँधी ने बराबर शिक्षा में आध्यात्मिक तत्वों के समाहार की वकालत की। राज्यपाल ने कहा कि ‘गाँधीवाद’ कोई दर्शन नही, बल्कि गाँधी जी द्वारा अपने जीवन में सत्य के साथ किए गये प्रयोगों का प्रतिफलन है. यही मानव-जीवन को स्वावलंबी, स्वदेशी और नैतिक बनाने का एक महत्त्वपूर्ण जरिया भी है.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, यह एक विडम्बना है कि आजादी मिल जाने के बाद गाँधी हमसे छीन गए तथा देश का भूगोल रचनेवाले सरदार पटेल भी स्वतंत्र भारत में बहुत दिनों तक हमारा साथ नहीं निभा सके साथ ही उन्होंने कहा कि, समाज-सुधार को व्यापक आयाम प्रदान करनेवाले स्वामी दयानंद सरस्वती भी पर्याप्त दिनों तक भारतवर्ष का मार्ग-दर्शन नहीं कर सके और पूरे विश्व में भारतीय आध्यात्मिक चिंतन को प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी विवेकानंद भी हामरे बीच बहुत दिनों तक नहीं रह सके. उन्होंने कहा कि ये सभी लोग अपने छोटे जीवन के बावजूद अपना लक्ष्य हासिल करने में पीछे नहीं रहे.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, वर्तमान समय में जो लोग गाँधी के सिद्धांतों पर अमल नहीं करते, उन्हें भी अपने विचारों को गाँधी के सिद्धांतों के आवरण में ही प्रस्तुत करने को विवश होना पड़ता है. उन्होंने कहा कि गाँधी-दर्शन को आज भारतीय शिक्षा-व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि गाँधी के आर्थिक सिद्धांतों से ग्राम्य-विकास में मदद मिलेगी तथा हमारी अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी. राज्यपाल टंडन ने कहा कि, गाँधी जी ने कभी भी सत्ता की ओर मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कहा कि, गाँधी को याद करने के लिए तथा उनके जीवन-दर्शन पर अमल करने के लिए सत्ता-लोलुपता को त्यागना  पड़ेगा.

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गाँधीवादी चिन्तक रामजी सिंह ने कहा कि राजनीति में धर्म का सार्थक हस्तक्षेप होना चाहिए, ताकि यहाँ नैतिक मान-मूल्यों की मर्यादा बनी रहे. सिंह ने कहा कि गाँधी राजनीति का अध्यात्मीकरण चाहते थे. कहा कि अध्यात्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है, जबकि विज्ञान के बिना ज्ञान अंधा है साथ ही कहा कि, भारत की प्राचीन गणतंत्रीय व्यवस्था को लोकतंत्र का प्राण बताया. उन्होंने कहा कि गाँधी कभी अप्रासंगिक हो ही नहीं सकते. उनकी 150वीं जयंती पूरे विश्व में आज 200 से भी अधिक देशों में मनायी जा रही है.

इस कार्यक्रम के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए भागलपुर से आये डॉ॰ भगवान सिंह ने कहा कि गाँधी एक अहिंसक वीर थे. उन्होंने कहा कि ‘हिन्द स्वराज’ में अभिव्यक्त उनका जीवन-दर्शन आज भी भारत के लिए श्रेयस्कर है. राँची से आए गाँधीवादी विचारक और चिन्तक मधुकर ने कहा कि आज आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है, गरीब और अधिक गरीब होते जा रहे हैं. प्राकृतिक दोहन के कारण पर्यावरण असंतुलन की गंभीर समस्या पैदा हो गई है. गाँव कस्बों में तब्दील होते जा रहे हैं जबकि दूसरी ओर पर्यावरण की स्थिति ऐसी बिगड़ती जा रही है कि दिल्ली और पटना जैसे शहरों में रहना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि गाँधी ने कहा था कि ‘‘प्रकृति हमारी जरूरतें पूरी कर सकती है, लालचें नहीं”. गाँधी बराबर संयमित और नियमित जीवन जीने की सीख देते थे.

इस कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह भी उपस्थित थे. कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रासबिहारी प्रसाद सिंह ने स्वागत-भाषण किया, जबकि कुलसचिव कर्नल मनोज कुमार मिश्रा ने धन्यवाद-ज्ञापन प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता रामजी सिंह ने की एवं धन्यवाद-ज्ञापन पटना विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष (छात्र-कल्याण) एन॰के॰ झा ने किया. गुरुवार को ‘गाँधी-जीवन’-दर्शन पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में पटना विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं राजभवन के अधिकारियों ने भी भाग लिया.