क्या ऐसे ही होंगें…

क्या ऐसे ही होंगें…

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फोटो:- गूगल.

वर्तमान सरकार के चार साल पुरे होने पर देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये लेकिन, इन चार सालों में आम –आवाम दुधारू गाय साबित हो रही है. सरकार ने आने से पहले आम-आवाम को अच्छे दिन का वादा किया था लेकिन आते ही आम-आवाम के बुरे दिन शुरू हो गये. कहने को तो अच्छे दिन हैं पर आवाम ही जानती है कि अच्छे दिन क्या होते हैं…?

वर्तमान सरकार ने अच्छे दिन का वादा किया… लेकिन चंद को छोड़कर बाकि लोगों के बुरे दिन शुरू हो गये. वर्तमान समय में सरकारी कर्मी हो या गैर सरकारी, किसान हो या छोटे स्तर के बिजनेसमैन सभी अच्छे दिन का रोना रो रहें हैं. वर्तमान समय में सरकार सोशल मीडिया पर उपलब्बध है और देश के युवा भी दिन हो या रात सोशल मीडिया पर ही होते हैं. आकड़ें का जादुई खेल चल रहा है विश्वविद्यालयों में भी डिग्री बांटे जा रहे हैं जबकि, हिन्द की कुल आबादी के कुछ प्रतिशत युवाओं को ही सरकारी नौकरी मिल पा रही है. ये सरकार के अच्छे दिन का वादा है.

किसी भी सरकार के लिए पेट्रोलियम पदार्थ या उत्पाद सोने के अंडे देने के समान होती है. बताते चलें कि, भारत 80 प्रतिशत तेल का आयत करता है. कारण यह है कि, देश की आवाम को विलासता पूर्ण जीवन जीने के आदि हो गये है. बताते चलें कि, देश में आसानी से कार लोन भीं उपलब्बध हो रहा है. एक तरफ मंत्री फिटनेस चैलेंज कर रहे है तो दूसरी तरफ आधी से अधिक आबादी को पूर्ण कैलोरी वाली थाली भी मयस्सर नहीं होती है.

देश के किसान पहले भी बदहाल थे और आज भी है. इस देश में पानी (जल) 20 रूपये लीटर मिलता है जबकि गेंहू 16-17 रुपये किलो उपलब्बध हैं. बताते चलें कि, एक किलो गेंहू को पैदा करने में करीब 30 लीटर पानी की जरूरत पडती है. वर्तमान समय में किसानो की सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें समय पर कामगार नहीं मिलते हैं. सरकार की ओर से मुफ़्त में बिजली, घर और विलासिता पूर्ण समान तो मिलती ही है साथ ही मुफ़्त में खाना भी उपलब्बध हो रहा है. इन सब के अलावा सरकार की परियोजनाओं के कारण भी कामगार खेतों से दूर हो रहें हैं. दूसरी बड़ी समस्या यह है कि उन्हें समय पर बीज, खाद व कीटनाशक भी उपलब्बध नहीं हो पाती है. सरकार व सरकारी कर्मी की लेटलतीफी के कारण भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. वर्तमान समय में सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है.

आजादी के बाद से ही शिक्षा का स्तर लगातार गिरता ही जा रहा है. आज के युवाए ग्रैजुएट और पोस्ट ग्रैजुएट की डिग्री लेकर सडक पर घूम रहे हैं ना तो वैकेंसी ही है और ना कोई रोजगार ही… . देश के अंदर कल- कारखानों की भारी कमी है तो वहीं दूसरी तरफ कई कल-कारखाने बंद हो गये हैं या बंद होने की कगार पर हैं. वर्तमान समय में देश की शिक्षा का हाल ऐसा है कि, पढ़े या ना पढ़े पास तो होना ही है और डिग्री का बोझ कंधे पर उठाकर चलना ही है. ग्लोबल दुनिया में आज के बच्चे और युवा किताबों से दूर हो रहे हैं और इंटरनेट की दुनिया में सोशल साईट पर व्यस्त है. वर्तमान समय में बच्चे और युवाओं के पास जितना समय है उसका 90 प्रतिशत समय सोशल साईट पर ही उपलब्बध होते हैं.

किताबों से दूर होने के कारण आज के युवा व बच्चे भ्रामक जानकारी पर ही उतेजित हो रहे है. वर्तमान समय में सोशल साईट पर भ्रामक जानकारी या यूँ कहें कि, तथ्यों को जोड़-तोड़ कर एक दुसरे को संवाद भेजते हैं जबकि सच्चाई ठीक इसके विपरीत या उलटा होता है. हकीकत यह भी है कि, आज देश के अधिकतर स्कूल व कालेजों में शिक्षक भी उपलब्बध नहीं हैं. वर्तमान समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण बहुत ही तेजी से हो रहा है. स्कूल, कालेज व युनिवर्सिटी में शिक्षक तो मौजूद नहीं हैं लेकिन बाजार में तरह तरह के नामीगिरामी शिक्षक उपलब्बध है? सरकार की गलत नीतियों के कारण ही देश में बेरोजगारों की फौज बढ़ रही है. क्या ऐसे ही होंगें अच्छे दिन…….?