कौमी एकजे़हती मुल्क की तरक्की के लिए बेहद जरूरी :- राज्यपाल

कौमी एकजे़हती मुल्क की तरक्की के लिए बेहद जरूरी :- राज्यपाल

23
0
SHARE
जब हरेक इंसान को मुल्क के जर्रे-जर्रे से मुहब्बत होगी, तभी कौमी एकता मजबूत होगी और देश तेजी से तरक्की कर पायेगा. फोटो:-पीआरडी, पटना.

बुधवार को महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति फागू चौहान ने पटना स्थित मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के तत्वावधान में में आयोजित ‘‘राष्ट्रीय अखंडता में अरबी-फारसी एवं उर्दू भाषा की भूमिका’’ विषयक राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि, ‘‘जब हरेक इंसान को मुल्क के जर्रे-जर्रे से मुहब्बत होगी, तभी कौमी एकता मजबूत होगी और देश तेजी से तरक्की कर पायेगा.‘राष्ट्रधर्म’ से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है. राष्ट्रीय एकता के विकास से ही भारत पूरी दुनियाँ का पुनः सिरमौर बनेगा. उर्दू, अरबी-फारसी -ये सभी भाषाएँ भारत की एकता, अखंडता, सामाजिक सद्भावना और समरसता में विश्वास रखनेवाली भाषाएँ हैं. इनके साहित्यकार भी मुल्क की कौमी एकजे़हती में विश्वास रखते हैं तथा राष्ट्रीय एकता को वे सर्वोपरि मानते हैं.’’

राज्यपाल चौहान ने कहा कि किसी देश की मजबूती और तरक्की में जितना बड़ा योगदान सामाजिक-राजनीतिक नेताओं-कार्यकर्त्ताओं का होता है, उससे किसी मायने में कम उस मुल्क के अदीबों (साहित्यकारों), कलाकारों, शायरों-कवियों आदि का नहीं होता. अरबी-फारसी और उर्दू भाषाओं के विद्वान और शायरों का भारतीय स्वतंत्रता-आन्दोलन में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है.

राज्यपाल चौहान ने मौलाना मजहरूल हक को याद करते हुए कहा कि मौलाना साहब दरअसल एक ऐसे इंसान थे, जिन्होंने कौमी एकजे़हती और तालीमी व्यवस्था के विकास के लिए अपनी जिन्दगी में भरपूर काम किया. उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए अपनी जिन्दगी की आखिरी साँस तक काम किया. वस्तुतः मौलाना साहब को इस बात में पूरा यकीन था कि साम्प्रदायिक सद्भावना मुल्क की बेहतरी और तरक्की के लिए निहायत जरूरी है. उनको इस बात का पूरा एहसास था कि प्यार, भाईचारा और आपसी मेलो-मोहब्बत के बल पर ही हिन्दुस्तान की हिफाजत और तरक्की निर्भर है. मौलाना साहब यह मानते थे कि हिन्दुस्तान उस बाग के समान है, जहाँ किस्म-किस्म के फूलों की खूबसूरती और सुगंध इसकी रौनक बढ़ा रही है.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि मौलाना साहब भारत की सामासिक-संस्कृति और ‘विविधता में एकता’ के बहुत बड़े हिमायती थे. उन्होंने कहा कि मौलाना साहब राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बेहद करीबी सहयोगी थे. राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि मौलाना साहब के सपनों को साकार करने की दिशा  में उनके नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय काफी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहा होगा और आज के आयोजन को भी इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए. राज्यपाल ने कार्यक्रम में ‘स्मारिका’ का भी विमोचन किया.

कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन प्रसाद वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सूबे में भाईचारा, मेलो-मुहब्बत और सामाजिक सद्भावना के विकास के लिए भरपूर प्रयास कर रही है और इसमें पूरी कामयाबी भी मिल रही है. उन्होंने कहा कि कौमी एकजे़हती के माहौल में ही मुल्क तेजी से तरक्की कर सकता है.

उद्घाटन-समारोह में अपने विद्वतापूर्ण संबोधन के दौरान प्रो०तलहा रिजवी बर्क ने कहा कि खयालात में एकजे़हती के साथ-साथ व्यवहार में ऐकजेहती भी बहुत जरूरी होती है. उन्होंने उर्दू एवं अरबी-फारसी के कई शायरों के खूबसूरत शेरों को पेश करते हुए उर्दू और अरबी-फारसी भाषा की अमन और कौमी एकजे़हती के विकास में सार्थक भूमिका को रेखांकित किया.

कार्यक्रम में स्वागत-भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० खालिद मिर्जा एवं धन्यवाद-ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो० सैय्यद मो० रफीक आजम ने किया. कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग आमिर सुबहानी, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा तथा कुलसचिव कर्नल कामेश कुमार भी उपस्थित थे.

ज्ञातव्य है कि इस राष्ट्रीय सेमिनार में प्रो० अब्दुल बारी (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी), प्रो० सैयद अख्तर हुसैन (जे०एन०यू०),प्रो० अशफाक अहमद(बी०एच०यू०), प्रो० ख्वाजा, मो० एकरामुद्दीन (जे०एन०यू०) सहित कई राष्ट्रीय ख्याति के विद्वानों ने भी शिरकत की है.