कार्तिक पूर्णिमा…

कार्तिक पूर्णिमा…

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप का शमन होता है. फोटो:-गूगल.

 ‘नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:।।’

हिन्दू धर्म में कार्तिक के महीने को बड़ा ही पवित्र और पावन माना जाता है. हिन्दू पंचांग अनुसार कार्तिक का महिना साल का आठवां महिना होता है. वैसे तो हिन्दू धर्म में किसी भी महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है लेकिन, कार्तिक महीने के पूर्णिमा का महत्व ज्यादा होता है. कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुर पूर्णिमा भी कहा जाता है. कहा जाता है कि, इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष स्नान करने का  फल मिलता है.

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप का शमन होता है. इस दिन किये गए दान का बहुत ही महत्व बताया गया है. कार्तिक पुर्णिमा के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है साथ ही कहा जाता है कि, कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर किसी भी व्यक्ति को बिना स्नान किए नहीं रहना चाहिए.

पौराणिक ग्रन्थों के एक प्रसंग के अनुसार, महर्षि अंगीरा ने कहा है कि, यदि स्नान में कुशा और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फल की प्राप्ति नहीं होती है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करते समय पहले हाथ पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें, इसी प्रकार दान देते समय में हाथ में जल लेकर दान करना चाहिए.

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, इसी वजह से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को  भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था. ग्रन्थों के अनुसार, सभी लोकों में गोलोक का स्थान सर्वोच्च है. कहा जाता है कि, कार्तिक पूर्णिमा को गोलोक के रासमण्डल में श्री कृष्ण ने श्री राधा का पूजन किया था. कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था. कार्तिक पूर्णिमा को राधिका जी की शुभ प्रतिमा का दर्शन और वन्दन करके मनुष्य जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है और इस दिन श्री हरि को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं.

ग्रन्थों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति कार्तिक के महीने में तुलसी वृक्ष के नीचे श्री राधाकृष्ण का पूजा निष्काम भाव से करता है उन्हें अपना जीवन मुक्त समझना चाहिए. कार्तिक पूर्णिमा के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है. इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह महापूर्णिमा कहलाती है. कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो “पद्मक योग” बनता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति होती है.

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिन सिख धर्म से जुड़े लोग सुबह स्नान कर गुरुद्वारे में जाकर गुरु नानक देव की के वचन सुनते हैं और धर्म के रास्ते पर चलने का प्रण लेते हैं. पूर्णिमा के दिन गुरु नानक देव जी का जन्म होने के कारण इस दिन को गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है.