औषधीय गुणों से युक्त है करेला…

औषधीय गुणों से युक्त है करेला…

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करेला विभिन्न आकर के पाए जातें हैं जबकि, इसकी चाइनीज वेरायटी 20-30 सेंटीमीटर लंबी होती है और इसका रंग पीला होता है. फोटो:-गूगल..

करेला का नाम सुनते ही उसके कडवेपन का स्वाद जेहन में आ जाता है. इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे कारवेल्लक, कारवेल्लिका, करेल, करेली और काँरले. इसे अंग्रेजी में Bitter Gourd कहते हैं. करेला का वैज्ञानिक नाम है Momordica Charantia (मोमोर्डिका चारेंटिया). ज्ञात है कि, करेला अपने गुणों से ज्यादा कड़वे स्वाद के लिए जाना जाता है लेकिन, इसके औषधीय गुणों के कारण आमलोगों में प्रिय है.

करेला एक उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय लता है जिसके फलों की कई तरह सब्जी, आचार और औषधी (दवाई) बनाने में प्रयोग किया जाता है. इसका जन्म पुरानी दुनिया के उष्ण क्षेत्र अफ्रीका और चीन माने जाते हैं. करेले को कुकरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल के मोमोर्डिका चरंशिया (Momordica charantia) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है. आमतौर पर इसका रंग हरा होता है, इसकी सतह पर उभरे हुए दाने होते हैं और इसके अंदर के बीज का रंग उजला होता है लेकिन, पक जाने पर करेला का रंग पीला और बीजों का रंग लाल हो जाता है. भारत में इसकी जंगली जातियाँ आज भी उगती हुई देखी गयी हैं. करेला विभिन्न आकर के पाए जातें हैं जबकि, इसकी चाइनीज वेरायटी 20-30 सेंटीमीटर लंबी होती है और इसका रंग पीला होता है. करेले की खेती सम्पूर्ण भारत में की जाती है.

करेला जितना कड़वा होता है यह उतना ही गुणकारी भी होता है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी विटामिन पाए जाते हैं. करेले में प्रचूर मात्रा में विटामिन A, B और C पाए जाते हैं साथ ही इसमें कैरोटीन, बीटाकैरोटीन, लूटीन, आइरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैगनीज जैसे फ्लावोन्वाइड भी पाए जाते हैं. यूँ तो करेला कड़वा, शीतल, हलका और वातकारक होता है. यह बुखार (ज्वर), पित्त, कफ, रुधिर (खून) विकार, पाण्डुरोग, प्रमेह और कृमि रोग को दूर करता है. बड़े करेले के वनिस्पत छोटा करेला ज्यादा गुणकारी होता है. यह हमारी पाचन शक्ति को ठीक करता है साथ ही भूख को बढ़ाता है. यह पचने में हल्का होता है और कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है. आयुर्वेदीक चिकत्सक के अनुसार, मधुमेह (Diabetes) रोगियों के लिए रामबाण औषधि है. करेले के फल ही नहीं इसकी पत्तियों का प्रयोग औषधी के रूप में किया जाता है. करेला कई बीमारियों को दूर भगाने में मदद करता है.

  • करेले की तासीर ठंडी होती है साथ ही यह पचने में हल्का होता है. यह पाचन क्रिया को ठीक करने में मदद करता है और भूख को बढाता है. करेले में कार्बोहाइडेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन व वसा और विटामिन ए, सी भी पाया जाता है.
  • मधुमेह के रोगियों के लिए करेला का रस (जूस) अमृत के समान है. इसमें इंसुलिन की तरह के कई रसायन पाए जाते हैं.जो ब्लड में सुगर लेबल को कम करने में सहायक होता है.
  • करेला रक्तशोधक होता है और त्वचा के रोगियों के लिए लाभकारी होता है. इसके फल या पत्तियों को पीसकर लगाने या पीने से त्वचा रोग दूर हो जाते हैं. अगर आप चर्म रोगों से परेशान हैं तो इसके रस में थोड़ी सी शहद मिलाकर पीने से रक्त (ब्लड) साफ़ हो जाता है.
  • करेले की पत्तियों को पीसकर लगाने से त्वचा आकर्षक और सुंदर हो जाती है.
  • करेले में पाया जाने वाला खनिज और विटामिन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है साथ ही कैंसर से भी लड़ने में मदद करता है.
  • गठिया या जोड़ों के दर्द में करेले की पत्तों के रस से मालिश करने से आराम मिलता है.
  • यह उलटी व डीएसटी में भी लाभकारी होता है.
  • यह मोटापा दूर करने में सहायक होता है.
  • हैजा के रोगियों को करेले के रस में प्याज का रस व कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ मिलता है.
  • करेले के रस में हींग मिलकर पीने से पेशाब खुलकर आता है.
  • करेले के रस में शहद मिलाकर पीने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है.
  • करेले के पत्तों के रस में शक्कर मिलाकर पीने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है.
  • करेले के पत्तों को पीसकर इससे आग से जले हुए घावों पर लगाने आराम मिलता है.
  • सिरदर्द होने पर करेले के रस का लेप लगाने से आराम मिलता है.
  • मुंह में छाले होने पर करेले के रस में फिटकरी मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छले ठीक हो जाते हैं.
  • करेले का रस आँखों में भी लाभदायक होता है.
  • करेले का रस पीने से लीवर ठीक हो जाता है.
  • करेले का नियमित सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है साथ ही अपच और कब्ज की शिकायत को दूर करने में सहायक होता है.
  • करेले के रस में शहद और हल्दी मिलकर पीने से खसरा ठीक हो जाता है.
  • करेले के रस में तुलसी के पत्तों का रस और शहद मिलाकर पीने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगियों को आराम मिलता है.
  • खाली पेट में करेले के रस में नींबू का रस मिलकर पीने से स्किन इंफेक्शन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है.