आश्विन नवरात्रा…

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देवी उपासना सांसारिक जीवन के सभी दुखों का नाश कर भरपूर सुख देने वाली मानी गई है. फोटो:- जेपी

जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे।

जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥

पौराणिक धर्म ग्रंथों में माँ जगतजननी दुर्गा को आद्यशक्ति भी कहा जाता है. देवी शक्ति के खासतौर पर तीन रूप जगत प्रसिद्ध है . महादुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती. वहीं नवदुर्गा दस महाविद्या के रूप में भी देवी के अद्भुत और चमत्कारिक स्वरूप पूजनीय है. दुर्गासप्तशती मार्कण्डेय पुराण का अंग है और वेदव्यास द्वारा रचित पवित्र पुराणों में एक है.

मार्कण्डेय पुराण में दुर्गासप्तशती के रूप में मार्कण्डेय मुनि द्वारा पूरे जगत की रचना व मनुओं के बारे में बताते हुए जगतजननी देवी भगवती की शक्तियों की स्तुति की गई है. इसमें देवी की शक्ति व महिमा उजागर करते सात सौ मंत्रों के शामिल होने से यह सप्तशती नाम से पुकारी जाती है. देवी उपासना सांसारिक जीवन के सभी दुखों का नाश कर भरपूर सुख देने वाली मानी गई है.

फोटो:- जेपी.