आयुर्वेदिक औषधी भी है हरसिंगार का पेड़…

आयुर्वेदिक औषधी भी है हरसिंगार का पेड़…

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हरसिंगार के फूल को पश्चिम बंगाल का राजकीय फुल भी माना जाता है. फोटो:- जेपी

फूलों के रंग और उसकी खुशबु इतनी मोहक होती है कि उसके दीवाने हर कोई होता है. प्रकृति ने हमें तमाम चीजे प्रदान की है उनमें से हर दिल अजीज फुल भी दिए हैं. ज्यादातर फुल दिन में ही खिलते हैं लेकिन कुछ फुल ऐसे होते हैं जो रात में ही खिलते हैं. आज हम एक ऐसे फुल के बारे में बात कर रहें है जो दक्षिण एशिया और वेस्टइंडीज देश का पौधा है जो शाम होने के साथ ही खिलते है इसकी खुशबु इतनी मीठी होती है कि दूर तक इसकी मीठी और मनमोहक खुशबु जाती है. इसके फुल के बारे में कहा जाता है कि इसके फुल पूर्णिमा तक पूरी तरह से खिल जाते है और सुगंध भी बढ़ जाती है लेकिन, आमवस्या के दिन नहीं खिलते हैं. इस फुल का नाम है हरसिंगार इसे रात की रानी भी कहा जाता है.

भारतीय संस्कृति में हरसिंगार का बहुत ही महत्व होता है. इसके फुल भगवान की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यह सोलनेसी कुल का एक पादप है और इसका वनस्पतिक नाम निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस (Nicthenes arbortristics) है. इसके कई नाम हैं जैसे रात रानी या परिजात के नाम से जानते हैं. अंग्रेजी में इसे नाइट जेस्मिन (Knight Jasmine) के नाम से जानते है जबकि उर्दू में इसे गुलज़ाफ़री कहा जाता है. संस्कृत में शेफालिका, मैथिली में सिंघार, सिंगरहार, मराठी में पारिजातक, गुजराती में हरशणगार, बंगाली में शेफालिका, शिउली, असम में शेवालि, तेलुगू में पारिजातमु, पगडमल्लै, तमिल में पवलमल्लिकै, मलयालम में पारिजातकोय, और कन्नड़ में पारिजात के नाम से जाना जाता है.

हरसिंगार का वृक्ष पुरे भारतवर्ष में पाया जाता हैं. बताते चलें कि, हरसिंगार के फूल को पश्चिम बंगाल का राजकीय फुल भी माना जाता है. हरसिंगार का वृक्ष झाड़ीनुमा होता है. इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है और कहीं कहीं 25-30 फीट ऊँचा एक वृक्ष होता है. इसके पेड़ की छाल जगह-जगह परत दर सलेटी से रंग की होती है एवं पत्तियाँ हल्की रोयेंदार छह से बारह सेमी लंबी और ढाई से.मी. चौड़ी होती हैं.हरसिंगार के पेड़ पर रात्रि में खुशबूदार छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और एवं फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है. इसके फूल अगस्त से दिसम्बर तक आते हैं.

हरसिंगार के फूलों में सुगंधित तेल होता है.रंगीन पुष्प नलिका में निक्टैन्थीन नामक रंग द्रव्य ग्लूकोसाइड के रूप में 0.1% होता है जो केसर में स्थित ए-क्रोसेटिन के सदृश्य होता है.बीज मज्जा से 12-16% पीले भूरे रंग का स्थिर तेल निकलता है.पत्तों में टैनिक एसिड, मेथिलसेलिसिलेट, एक ग्लाइकोसाइड 1%, मैनिटाल 1.3% और कुछ उड़नशील तेल, विटामिन सी और ए पाया जाता है.हरसिंगार के पत्तों और फूलों में एंटी बैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुण भरपूर मात्रा में होते है.

हरसिंगार के चिकित्सीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसके पत्ते, छाल और फूल को औषधि के रुप में उपयोग किया जाता है. इसके पूरे पेड़ का उपयोग दवाइयों और सौंदर्य सामग्रियों के निर्माण में किया जाता है.हरसिंगार के फूल सुगन्धित होते है,जिसके कारण इसका उपयोग सौंदर्य सामग्री में किया जाता है.इसके पत्तो का प्रयोग साईटिका और गठिया जैसे रोगो के लिए किया जाता है.

  • अगर आप आर्थराइटिस या जोड़ो के दर्द से परेशान है तो इसके लिए हरसिंगार के छह सात पत्ते तोड़ ले और उसे पीस कर उसकी चटनी बना लें और गर्म पानी के साथ सुबह-शाम खाली पेट में प्रयोग करना चाहिए.
  • हरसिंगार के 06-07 पत्ते तोड़कर पानी में उबाले. जब पानी की मात्र आधी हो जाए तो इसे ठंडा कर पीने से गठिया के दर्द में आराम मिलता है.
  • अगर आप बाबासीर से परेशान हो तो इसके इसके बीजों को पिस कर लेप बनाकर लगाने आराम मिलता है.
  • किसी भी प्रकार के बुखार में हरसिंगार की पत्तियों का चाय पीने से आराम मिलता है. जबकि मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू के बुखार में हरसिंगार के पत्तों का रस बना लें .उस रस दो चम्मच अदरक का रस और शहद मिलकर पीने से आराम मिलता है.
  • हरसिंगारके पत्तो को पीसकर शहद मिलकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं.
  • त्वचा से सम्बंधित रोगों में हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से लाभ मिलता है और त्वचा संबंधी समस्याएं समाप्त होती हैं.
  • हरसिंगार के फूल को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरा उजला और चमकदार हो जाता है.