आधुनिकता और अंधविश्वास…

आधुनिकता और अंधविश्वास…

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कुछ स्वार्थी और ढोंगी लोगों की वजह से धर्म के प्रति आस्था कम होती जा रही है.

हम सभी 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं, डिजिटल क्रांति का दौर चल रहा है, फिर भी लोगो की मानसिकता धर्म और अंधविश्वास पर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है, या यूँ कहें कि बढ़ रहा है. हिन्द का प्राचीन इतिहास अपने आप में अनोखा है, यहां की संस्कृति की खुशबु से पूरी दुनिया महक रही है. वर्तमान समय में अपनी संस्कृति को छोडकर आधुनिकता को हमसफर बना रहे हैं साथ ही, धर्म को ना समझकर अंधविश्वास की ओर प्रेरित हो रहे हैं. आये दिन अखबार व न्यूज़ चैनल में बाबाओं के कारनामे देखते व सुनते हैं, फिर भी ऐसे बाबाओं के अनुआई बनते रहते हैं. शांति व मोक्ष प्राप्ति के लिए धर्म का सहारा लेते हैं, पर कुछ स्वार्थी और ढोंगी लोगों की वजह से धर्म में आशा कम होती जा रही है. परेशान लोगों को झूठी-सांत्वना देकर बाबा और उनके एजेंट अपने चंगुल में फंसाते हैं और खुद को स्वघोषित भगवान मानने के लिए प्रेरित करते हैं. ऐसा सिर्फ हिन्दू धर्म में ही नहीं होता है, बल्कि अन्य धर्मों में भी होता है…

आधुनिक जमाने में ब्रैंडिंग और मार्केटिंग सबसे बड़ी कला मानी जाती है, और यही ढोंगी बाबाओं का सबसे बड़ा हथियार होता है. टीवी, अखबार और सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे लोग “खुद” का प्रचार कराते हैं, और अपने  को भगवान का अवतार बताते हुए, लोगों की सभी परेशानियां दूर करने का दावा भी करते हैं. अपने दुख में उलझी जनता इनके झांसे में आसानी से आ जाती है. इस ट्रिक की वजह से खुद को स्वघोषित भगवान मानने लगते है. कहा जाता है कि झूठ कितना भी शक्तिशाली हो, उसका पर्दाफाश जरूर होता है. इसके उदाहरण… संत राम रहीम, आसाराम, इच्छाधारी बाबा भीमानंद, निर्मल बाबा, रामपाल और राधे मां. देर ही सही लेकिन इनकी सच्चाई से पर्दा उठा चुका है, और लोगों की आस्था ताड़-ताड़ हुई या यूँ कहें कि, स्वप्न का मायाजाल टूट गया. ढोंगी बाबाओं को धर्म की कमजोरियों को फायदा उठाने की कला खूब आती है, उन्हें पता होता है कि लोग की कमजोरियां क्या हैं, और उन कमजोरियों को उसे धर्म से जोड़ देते हैं. लोगों को पता भी नहीं चलता है कि, आस्था के नाम पर उनके साथ खेल हो रहा है.

ढोंगी बाबाओं में अक्सर यह देखा गया है कि ये आकर्षक आवरण में होते हैं, जैसे… इच्छाधारी बाबा भीमानंद, राधे मां, स्वामी नित्यानंद और निर्मल बाबा के कपड़ों और रहन-सहन पर ध्यान दें तो, पता चलता है कि ये आम-आवाम  से हटकर वस्त्र पहनते हैं. इनके बैठने के आसन व तरीका,  कपड़ों का स्टाइल, मंच की साज-सज्जा अनोखी होती है, जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है. इन लोगों की वाकपटुता की वजह से भोले-भाले लोग आसानी से उनकी बातों में आ जाते हैं, ऐसे लोगों में वो कला होती है जो बातों से ही सम्मोहित कर ले. इसके बाद उनकी हर बात सही लगने लगती है, और अपनी मीठी बातों में फंसाकर ये ढोंगी बाबा लोगों को बरगलाने लगते हैं.