आखिर कब तक….

आखिर कब तक….

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एक बुढा बाप आखिर कब तक अपने शहीद हुए जवान बेटे के शव को कंधा देते रहेंगें. फोटो:-गूगल..

दिन, महीने और साल ही नहीं साल दर साल, हमारे जवानों पर हमला होता रहता है और जवान शहीद होते रहते हैं ठीक उसी प्रकार सरकारें आती रहती है और जाती रहती है लेकिन, हमारे जवान शहीद होते रहते हैं. कभी घर के अंदर तो कभी सीमा पर… जवान शहीद होते रहते हैं. एक बुढा बाप आखिर कब तक अपने शहीद हुए जवान बेटे के शव को कंधा देते रहेंगें.

आजादी से अबतक जितनी भी कायरतापूर्ण घटनाएं घटित हुई है उसका जिम्मेदार बस एक ही है. दुनिया के सभी देशों ने पुलवामा की घटना पर शोक जताया है. आजादी के बाद देश के किसी व्यक्ति की कुसी प्रेम ने देश को इस हाल पे लाकर खड़ा कर दिया है. हम ‘रो सकते हैं लेकिन कुछ कर नहीं सकते’.

जब भी भारत में ऐसी घटना घटी है तब-तब दुनिया के तमाम मंचों से एक ही आवाज आई है आतंकवाद और पाकिस्तान पर कड़ी कारवाई करेंगें. साल दर साल बीत जाते हैं अपने मन और भावनाओं को समझाने में लेकिन, बात जहां होती है वहीं दफ़न हो जाती है. हम जब भी पाकिस्तान को घेरने की बात करते हैं तो दुनिया के अंतर्राष्ट्रीय मंचों से से अपील करते हैं और पकिस्तान…. कभी अमेरिका तो कभी चीन की गोद में बैठकर देश के भीतर किसी भी पल कहीं भी आतंकी हमला करते हैं और चले जाते हैं.

समझ में नहीं आता है की, शासन करने वालों का लहू पानी हो गया है कि हमारे वीर जवानों  के लहू को यूँ ही बहाया जा रहा है. हम तमाम मंचों को देखते हैं उम्मीद करते है कि वो हमें इस मुद्दे पर मदद देंगें लकिन, शोक व्यक्त कर भूल जाते हैं और हमारे वीर जवान अपने प्राणों की आहुति देते रहते हैं. सैनिक अपने पराक्रम से देश की अखंडता और सम्प्रभुता की रक्षा करते हैं और देश को चलाने वाले अपनी कुर्सी को बचाने और अपील करने में…. आखिर कब तक एक बुढा बाप आखिर कब तक अपने शहीद हुए जवान बेटे के शव को कंधा देते रहेंगें.

भारत देश की सीमा पर दो ऐसे देश है जो बार-बार घटनाओं को दुहराते रहते है और हम बार-बार शांति का पाठ पढ़ाकर चुप हो जाते हैं. कहने को तो बड़ी-बड़ी बातों से मरहम लगाते हैं लेकिन इन देशों को कुछ कर पाने में असफल रहते हैं. वर्तमान समय में बाजार अपनी जेब में है लेकिन, जब से बाजार जेब में आई है तब से आतंकी घटनाएं बढती ही जा रही है और हम विवश होकर अंतराष्ट्रीय मंचों की और देखते हैं पर इन देशो को सबक नहीं सीखा सकते हैं. ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सिसक-सिसक कर जीने को मजबूर हो गयें है भारतीय. एक तरफ दुनिया जेब में आई और हम सभी अपनों से दूर हो गये.

एक दशक में करीब 05 आतंकी हमले हुए, जिसमें अबतक का सबसे बड़ा भीषण आतंकी हमला है. एक नजर अब तक हुए आतंकी हमले पर….

वर्ष 2015 :- पंजाब के गुरुदासपुर में आतंकियों ने एक बीएस पर हमला किया. उसके बाद दीनानगर थाणे में घुस कर फायरिंग की. जिसमें 07 लोग मारे गये थे.

वर्ष 2016 :- जनवरी महीने में जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने पठानकोट में एयरफोर्स के बेस पर हमला किया था जिसमे जिसमे 03 जवान शहीद हुए थे. इस हमले के दौरान हुई मुठभेड़ में भारतीय सैनिकों ने 04 आतंकवादियों को भी मार गिराया था.

वर्ष 2016 :- सितम्बर महीने में जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने उरी में सेना के ठिकाने पर हमला किया था जिसमें 19 सैनिक शहीद हुए थे. इस मुठभेड़ में भारतीय सैनिकों ने 04 आतंकवादियों को मार गिराया था.

वर्ष 2017 :- बस पर सवार होकर अमरनाथ की यात्रा जा रहे श्रद्धालुओं पर भी आतंकियों ने हमला किया था जिसमें 07 लोगों की मौत हुई थी.

वर्ष 2019 :- फरवरी महीने में जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने कश्मीर के पुलवामा में  सीआरपीएफ जवानो के काफिले को निशाना बनाया और आत्मघाती हमला कर भरी बस को उड़ा दिया जिसमें 40 जवान शहीद हो गए.

दुनिया के तमाम मंचों ने पुलवामा हमले पर शोक संदेश दिया है लेकिन, चीन को संदेश देने में 24 घंटे लग गये जबकि, पाकिस्तान ने अबतक कुछ नहीं बोला है. जब भी बात आती है जैश ए मोहम्मद के आका या यूँ कहें कि मुखिया मसूद अजहर को बैन करने की तब-तब चीन इसका विरोध करता है और पाकिस्तानी हुक्मरान मसूद अजहर के सहारे भारत में आतंकी हमला करवाते रहते है और देश के वीर जवानों का लहू यूँ ही बर्वाद होता रहता है. हम सभी तमाम मंचों को देखते हैं पर ना तो चीन या पाकिस्तान के उपर किसी बड़ी कारवाई को अंजाम देते हैं. वर्ष का कोई ऐसा महीना नहीं जहाँ एक बुढा बाप अपने शहीद हुए जवान बेटे के शव को कंधा देते हैं… और ताउम्र सिसक-सिसक कर जीवन जीने को मजबूर होते हैं. आखिर कब तक ये सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा… कब तक अपने भाइयों को यूँ ही खोते रहेंगें.