अरुण जेटली…

अरुण जेटली…

324
0
SHARE
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त व रक्षा मंत्री अरुण जेटली का एम्स में निधन हो गया. फोटो :- गूगल.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त व रक्षा मंत्री अरुण जेटली का एम्स में निधन हो गया. ज्ञात है कि, बीते 09 अगस्त को उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शनिवार 24 अगस्त 2019 की दोपहर 12:07 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली.

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली  में हुआ था उनके पिता का नाम महाराज किशन जेटली है जो एक वकील थे और उनकी माता का नाम रतन प्रभा जेटली. अरुण जेटली ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल (नई दिल्ली) से पूर्ण की. उसके बाद उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (नई दिल्ली) से कॉमर्स में स्नातक किया. जेटली ने वर्ष 1973 में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय से विधि की डिग्री प्राप्त किया. छात्र जीवन के कैरियर के दौरान उन्होंने अकादमिक और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त गतिविधियों दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ कई सम्मानों से नवाजा गया. बताते चलें कि, वर्ष 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे. अरुण जेटली वर्ष 1982 में विवाह बंधन में बंधे और उनकी पत्नी का नाम संगीता जेटली है. उनके दो बच्चे रोहन और सोनाली हैं.

अरुण जेटली ने अपने राजनितिक कैरियर की शुरुआत शुरुआत एबीवीपी से हुई और वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए. वर्ष 1977 में भी जेटली छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए और उसी साल उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया. बताते चलें कि, जब देश में आपातकाल लगाया गया था उस वक्त जेटली भी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल हुए और जेल भी गए. जेल में उनकी उनकी मुलाकात उस वक्त के वरिष्ठ नेताओं से हुई. जेल से छूटने के बाद भी उनका जनसंघ से संपर्क बना रहा और वर्ष 1980 में उन्हें बीजेपी की यूथ विंग का प्रभार दिया गया.

वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने. वर्ष 1999 में के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान भाजपा के प्रवक्ता बन गए. वर्ष 1999 में वाजपेयी सरकार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सत्ता में आने के बाद, उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार नियुक्त किया गया. उन्हें विनिवेश राज्य मंत्री का (स्वतंत्र प्रभार) भी नियुक्त किया गया. ज्ञात है कि विश्व व्यापार संगठन के शासन के तहत विनिवेश की नीति को प्रभावी करने के लिए पहली बार एक नया मंत्रालय बनाया गया. 23 जुलाई 2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला. नवम्बर 2000 में एक कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया था और एक साथ कानून, न्याय और कंपनी मामलों और जहाजरानी मंत्री बनाया गया था. भूतल परिवहन मंत्रालय के विभाजन के बाद वह नौवहन मंत्री थे. उन्होंने 01 जुलाई 2001 से केंद्रीय मंत्री, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री के रूप में 01 जुलाई 2002  को नौवहन के कार्यालय को भाजपा और उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में शामिल किया.

अरुण जेटली को 29 जनवरी 2003 को केंद्रीय मंत्रिमंडल में वाणिज्य और उद्योग और कानून और न्याय मंत्री के रूप में पुन: नियुक्त किया गया. 13 मई 2004 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हार के बाद जेटली महासचिव के रूप में भाजपा की सेवा करने के लिए वापस आ गए साथ उन्होंने कानूनी कैरियर में भी वापसी की. 03 जून 2009 को लाल कृष्ण आडवानी द्वारा राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया था. 16 जून 2009 को को उन्होंने अपनी पार्टी के ‘वन मैन वन पोस्ट सिद्धांत’ के अनुसार भाजपा के महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था. जेटली पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी थे.

बताते चलें कि, राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में, उन्होंने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक की बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जन लोकपाल विधेयक के लिए अन्ना हजारे का समर्थन भी किया. वर्ष 2002 में 2026 तक संसदीय सीटों को मुक्त करने के लिए भारत के संविधान में अस्सी-चौथा संशोधन सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया और वर्ष 2004  में भारत के संविधान में 90वें संशोधन दोषों को दंडित किया. ज्ञात है कि, वर्ष 1980 से पार्टी में होने के कारण उन्होंने वर्ष 2014 तक कभी कोई सीधा चुनाव नहीं लड़ा. वर्ष 2014 के आम चुनाव में वह लोकसभा सीट पर अमृतसर सीट के लिए भाजपा के उम्मीदवार थे लेकिन, वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार से हार गए थे. उसके बाद उन्हें गुजरात से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था. वर्ष 2018 में पुन: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया.

26 मई 2014 को नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जेटली को वित्त मंत्री के रूप में चुना गया (जिसमें उनके मंत्रिमंडल में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और रक्षा मंत्री शामिल हैं. ज्ञात है कि, बिहार विधान सभा चुनाव वर्ष 2015 के दौरान अरुण जेटली ने पीएम मोदी से बात कर सहमती व्यक्त की कि धर्म के आधार पर आरक्षण का विचार खतरे से भरा है और मुस्लिम दलितों और ईसाई दलितों को आरक्षण देने के खिलाफ है क्योंकि यह जनसांख्यिकी को प्रभावित कर सकता है. नवंबर 2015 में, जेटली ने कहा कि विवाह और तलाक को नियंत्रित करने वाले व्यक्तिगत कानून मौलिक अधिकारों के अधीन होने चाहिए, क्योंकि संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार सर्वोच्च हैं.

जेटली ने सितंबर 2016 में ‘आय घोषणा योजना’ की घोषणा भी की. बताते चलें कि, भारत के वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, सरकार ने 09 नवंबर, 2016 से भ्रष्टाचार, काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद पर अंकुश लगाने के इरादे से महात्मा गांधी श्रृंखला के 5001000  के नोटों का विमुद्रीकरण भी किया. वर्ष 2017 से ही जेटली लगातार स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे. वर्ष 2018 में उनकी किडनी का भी ट्रांसप्लांट किया गया और मोदी सरकार की ओर से 2019 में वह अंतरिम बजट पेश नहीं कर सके. वर्ष 2019 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मोदी सरकार में शामिल नहीं होने का ऐलान ट्विटर पर किया था.

बतातें चलें कि, देश के बेहतरीन वकीलों में अरुण जेटली का नाम भी शामिल है. उन्होंने 80 के दशक में ही जेटली ने सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण केस भी लड़े थे. वर्ष 1990 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर वकील का दर्जा भी  दिया था. वी०पी० सिंह की सरकार में उन्हें अडिशनल सलिसिटर जनरल का पद भी मिला था. वर्ष 1989 में बोफोर्स घोटाला (बोफोर्स घोटाला जिसमें पूर्व पीएम राजीव गांधी का भी नाम था) के केस से संबंधित पेपरवर्क भी किया था. उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह का केस लड़ा था. ज्ञात है कि वर्ष 2009 में उन्होंने वकालत का पेशा भी छोड़ दिया था.